Thursday, March 31, 2011

बंगाल में होता है राजनैतिक चेतना का रंगमंच - उषा गांगुली


विवेचना, जबलपुर और जबलपुर बंगाली एसोसियेशन के तत्वावधान में पश्चिम बंग नाट्य अकादमी कोलकाता के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय बांगला नाट्य समारोह के अंतिम दिन 19 सितंबर 2010 को प्रातः 10 बजे विवेचना द्वारा ’’ बंगाल का रंगपरिदृश्य’’ विषय पर एक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी को प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक उषा गांगुली और चंदन सेन ने संबोधित किया।
उषा जी ने कहा कि बंगाल मंे छोटे छोटे गांवों और कस्बों में बहुत गंभीरता से रंगकर्म होता है। नौजवान लोग नए नए प्रयोग करते हैं। बंगाल में करीब 3500 नाट्य संस्थाएं हैं। करीब एक लाख रंगकर्मी नाटक से जुड़े हुए हैं। भारत में महाराष्ट और बंगाल का रंगमंच सबसे पुराना और स्थापित है। महाराष्ट में रंगमंच सामाजिक समस्याओं को बहुत अच्छे से उठाता है। वहीं बंगाल का रंगमंच राजनैतिक रूप से बहुत जाग्रत है। महाराष्ट का रंगमंच प्रोड्यूसर केन्द्रित है। प्रोड्यूसर जैसा चाहता है वैसा नाटक होता है। नवंबर से जनवरी माह तक बंगाल में सैकड़ों नाट्य उत्सव और मंचन होते हैं। छोटे छेाटे ग्रुप मंे भी अद्भुत मैनेजमेंट, अभिनय, रिहर्सल और मंचन की व्यवस्थाएं होती हैं। उन्होंने विवेचना के नाट्य शिविर में शामिल प्रशिक्षुओं से कहा कि वे पूरे समर्पण से नाटक सीखें। नाटक सचाई सामने लाता है इसीलिए नाटक खबर नहीं बनता। नए लोग नाटक में शामिल होते हैं यह जानते हुए भी कि नाटक से कुछ नहीं मिलता। पर सीखना चाहते हैं। पूरे देश में करीब 1 करोड़ रंगकर्मी हैं। ये रोज कुछ नया रचते हैं। उनके काम में ताजगी होती है। नई पौध में नई चेतना होती है। एक साजिश के तहत यह खबर नहीं बनती क्योंकि थियेटर उधेड़ता है। सच्चाई को पेश करता है। आज बाजार हर जगह हावी है। लेकिन नाटक बाजार से हटकर है। जो नाटक और नाटक करने वाले बाजार का हिस्सा बनते हैं उनका कोई रचनात्मक योगदान नहीं रहता। थियेटर बाजार के साथ समझौता नहीं करता। उन्होंने किरण बेदी नाम लेकर कहा कि उनके काम के लिए हमारे मन में बहुत सम्मान है पर उन्हें साबुन पाउडर बेचने की क्या जरूरत है? यह बाजार से समझौता है।
प्रसिद्ध नाट्य लेखक और निर्देशक चंदन सेन ने कहा कि थियेटर का संपर्क जीवन और समाज की सच्चाई से है इसीलिए थियेटर हमेशा जीवित है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंग नाट्य अकादमी जैसी अकादमी कहीं नहीं है जो कला के हर क्षेत्र में कार्य करती है। उत्सव आयोजित करती है। प्रशिक्षण शिविर आयोजित करती है। यह वर्ष रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150 वीं जयंती का है। इस अवसर पर पूरे देश में आयोजन हो रहे हैं। बंगाल मंे हर वर्ष सैकड़ों नए नाटक लिखे जा रहे हैं। नए नए प्रयोग हो रहे हैं। गौतम हालदार, सपन मुकर्जी, कौशिक सेन, सुरंजना, सीबा मुकर्जी जैसे अनेक युवा नाटककार और निर्देशक सामने आए हैं जिनके काम को सराहा गया है। राष्टीय नाट्य विद्यालय दिल्ली द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव में केवल कलकत्ता से ही 7-8 नाटकों का चयन हो रहा है।
पश्चिम बंग नाट्य अकादमी के सदस्य सचिव सौरव कुमार वासु ने कहा कि कलाकार बाजार से प्रभावित न हों इसीलिए अकादमी द्वारा कलाकारों के प्रशिक्षण और मंचन की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। नाटकों के लिए पूर्ण सुसज्जित प्रेक्षागृह केवल चार सौ रूपयें में उपलब्ध कराया जाता है। किताबें प्रकाशित की जाती हैं। अकादमी के सभी कार्यकारिणी सदस्य नाटक के क्षेत्र से हैं।
गोष्ठी का संचालन सचिव हिमांशु राय व वसंत काशीकर ने किया। आभार प्रदर्शन बांके बिहारी ब्यौहार ने किया।

1 comment:

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